Friday, December 10, 2010

"देश"

कर्मबोध दायित्व जगाना गीता का उपदेश है.
सत्य अहिंसा का पावनतम शुचि इसका उपदेश है.
जन जन के भाग्योदय हित नवतम इसका उन्मेष है-
रामराज्य के सपनों का वन्दनीय यह देश है ..
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"सरकार"

शासन में जिसके खुशियों का संसार नहीं है.
नीतियों में जिसके पुष्ट जनाधार नहीं है.
जनता की हिफाजत जो करने में हो अक्षम-
वादों से जो मुकर जाय वो सरकार नहीं है ..

2 comments:

  1. हमें तो आज शर्म महसूस हुयी ..भारत की जीत की ख़ुशी उड़ गयी ... आपकी नहीं उडी तो आईये उड़ा देते है.
    डंके की चोट पर

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  2. बहुत अच्छी पोस्ट, शुभकामना, मैं सभी धर्मो को सम्मान देता हूँ, जिस तरह मुसलमान अपने धर्म के प्रति समर्पित है, उसी तरह हिन्दू भी समर्पित है. यदि समाज में प्रेम,आपसी सौहार्द और समरसता लानी है तो सभी के भावनाओ का सम्मान करना होगा.
    यहाँ भी आये. और अपने विचार अवश्य व्यक्त करें ताकि धार्मिक विवादों पर अंकुश लगाया जा सके., हो सके तो फालोवर बनकर हमारा हौसला भी बढ़ाएं.
    मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती.

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